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"नमस्ते और जय हिंद: अभिवादन की भारतीय शैली को अपनाना समय की माँग है"
परिचय
हमारे देश की समृद्ध संस्कृति और परंपराएँ हमारी पहचान हैं। लेकिन आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और पश्चिमी प्रभाव के चलते हम अपनी सांस्कृतिक मूल्यों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं। इसका एक स्पष्ट उदाहरण हमारी अभिवादन की शैली में देखा जा सकता है — जहाँ पहले ‘नमस्ते’ और ‘जय हिंद’ आम थे, अब उनकी जगह ‘गुड मॉर्निंग’, ‘गुड आफ्टरनून’, और ‘हैलो’ जैसे शब्दों ने ले ली है।
हालाँकि ये शब्द असभ्य नहीं हैं, परंतु भारतीय अभिवादन शैली को अपनाना न केवल हमारी संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखता है, बल्कि यह आत्मगौरव, शिष्टाचार और देशभक्ति का भी प्रतीक है।
🌼 नमस्ते और जय हिंद: केवल शब्द नहीं, संस्कार हैं
"नमस्ते" का अर्थ होता है "मैं आपके अंदर स्थित ईश्वर को नमस्कार करता हूँ।" यह न केवल विनम्रता दर्शाता है, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन का भी हिस्सा है।
वहीं "जय हिंद" केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान और गर्व को दर्शाने का माध्यम है।
⚠️ इस परिवर्तन की आवश्यकता क्यों है?
संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखना – बच्चों में भारतीय मूल्यों और परंपराओं के प्रति सम्मान तभी आएगा जब हम उन्हें रोज़मर्रा की छोटी आदतों में भी शामिल करेंगे।
राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास – ‘जय हिंद’ जैसे शब्द बच्चों को बचपन से ही देश के प्रति प्रेम और कर्तव्य की भावना से जोड़ते हैं।
आत्मविश्वास और गर्व – जब बच्चे अपनी संस्कृति पर गर्व महसूस करते हैं, तो उनका आत्मबल और सामाजिक आत्म-गौरव बढ़ता है।
वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक पहचान – एक वैश्विक दुनिया में अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं को अपनाकर ही हम अपनी पहचान को बनाए रख सकते हैं।
👨🏫 शिक्षकों की भूमिका स्कूल में
प्रतिदिन 'नमस्ते' और 'जय हिंद' से शुरुआत: स्कूल की प्रार्थना सभा, कक्षा की शुरुआत और समापन में शिक्षकों द्वारा नमस्ते और जय हिंद का उपयोग करने से यह आदत स्वतः बच्चों में विकसित होती है। < class="add_top_20 ">उदाहरण द्वारा शिक्षण: शिक्षक स्वयं इस शैली का पालन करें और बच्चों को भी प्रेरित करें। शिक्षक जो करते हैं, वही बच्चे सीखते हैं।
कहानियों, नाटकों और गतिविधियों के माध्यम से सीख: भारतीय संस्कृति पर आधारित कहानियों और गतिविधियों के ज़रिए बच्चों में मूल्य आधारित व्यवहार विकसित किया जा सकता है।
👨👩👧👦 अभिभावकों की भूमिका घर पर
घरेलू माहौल में भारतीय अभिवादन को बढ़ावा देना: जब बच्चे घर में माता-पिता और दादा-दादी से ‘नमस्ते’ करते हैं, तो यह उनके स्वभाव में शामिल हो जाता है।
नकारात्मक नहीं, प्रेरणादायक व्यवहार अपनाएँ: बच्चों को डाँटने या टोकने के बजाय, खुद नमस्ते कहकर उन्हें आदर्श दें।
छोटे-छोटे संस्कार सिखाना: जैसे बाहर से घर लौटने पर ‘नमस्ते’ कहना, या किसी वरिष्ठ व्यक्ति से मिलते समय ‘जय हिंद’ कहने की आदत डालना।
✅ फायदे जो बच्चों को मिलते हैं
संस्कृति के प्रति जुड़ाव
बड़ों के प्रति सम्मान और शिष्टाचार
देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना
सकारात्मक और विनम्र व्यक्तित्व का विकास
🌟 निष्कर्ष
आज के समय में जब दुनिया तेजी से बदल रही है, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी जड़ें हमारी पहचान हैं।
छोटे-छोटे बदलाव जैसे ‘गुड मॉर्निंग’ की जगह ‘नमस्ते’, ‘बाय’ की जगह ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का प्रयोग, बच्चों को उनकी संस्कृति, देश और आत्म-सम्मान से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।
शिक्षक और माता-पिता मिलकर अगर इस दिशा में पहल करें, तो आने वाली पीढ़ी एक ऐसे भारत का निर्माण करेगी जो आधुनिक भी होगा और अपनी जड़ों से जुड़ा भी।
आइए, मिलकर एक ऐसे समाज की शुरुआत करें जहाँ हर बच्चा आत्मगौरव से कहे — नमस्ते! जय हिंद! 🇮🇳